क्या है जो कहने से शेष रह गया है ऐसा कुछ नहीं जो नए सिरे से कहना है l अब जो भी कहा जाएगा वह पूर्व मे कहे गए कुछ कि नकल मात्र होगी l मतलब यह कि अब हम एक नकली दुनिया का हिस्सा है या फिर किसी पूर्व मे कही गयी किसी कहानी को फिर से इस दुनिया के मंच पर मंचित कर रहे हैं l हम सब जानते हैं और सबकुछ जानते है फिर भी सब अंजान हैं l वर्तमान दुनिया मे मौजूद कोई साढ़े सात अरब में से आज से सौ साल बाद यहाँ क्या कोई होगाl तो सोचिए कि साढ़े सात अरब लोग मरने वाले हैं और ये तय है फिर भी हम रँग, नाम, और जाने क्या क्या को लेकर लड़ रहे हैं सही बात तो यह है कि दुनिया पागलखाना है हम सबको ठीक होते ही निज धाम लौट जाना है l
Monday, 25 December 2017
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इश्क और उसके बाद
कुछ भी लिखना बहुत कठिन है उंगलियों में गुदगुदी होने लगती है लेकिन एक शब्द या एक वाक्य के बाद उतना ही सहज और सरल भी । एक ही वक्त में एक ही इ...
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बचपन मे जब भी प्रेमचंद की ईदगाह पढ़ता था तो इसे अपने यहाँ होने वाले गणगौर के साँचे में फिट करके देखता था। हालांकि हमारे मेले मे मैंने मिट्टी...
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